मई माह शुरु हो चुका है। धूप की तपिश बढ़ती ही जा रही है। सुबह से ही जानलेवा गर्मी पड़ने लगी है, अतः आप सभी के लिये कुछ उपयोगी, आसानी से करने योग्य उपाय प्रस्तुत है-
* लू चल रही हो तब बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें।
* सिर पर कपड़ा(गमछा) लपेट कर या छाता लगा कर बाहर निकलें। धूप में घूमते हुए ठण्डा पानी या पेय पदार्थ न पीएं।
* घर से निकलते समय एक गिलास ठण्डा पानी पी लें और जेब में एक प्याज रख लें। ऐसा करने से लू नहीं लगेगी।
* वापस घर को आएं तो तुरन्त ठण्डा पानी न पीएं, थोड़ी देर रुक कर शरीर को ठण्डा कर पानी पीएं। एक समय में एक गिलास पानी ही पीएं।
* बिना प्यास के भी घण्टे-घण्टे भर से पानी पीना चाहिए।
* तेज मिर्च-मसाले और गर्म प्रकृति वाला भोजन शराब, अण्डा, मांसाहार आदि का सेवन करने से पेशाब में रुकावट और जलन, अल्सर, एसिडिटी, हयपरएसिडिटी आदि बिमारियां उत्पन्न होती हैं।
* ग्रीष्म ऋतु में शीतल और तरावट वाला आहार ग्रहण करना चाहिए।
ग्रीष्म ऋतु में आयुर्वेदशास्त्र के अनुसार मधुर रस युक्त स्निग्ध(चिकनाई युक्त), शीतल, तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
सुश्रुत संहिता के अनुसार-
"शर्करा खण्ड दिग्धानि सुगन्धीनि हिमानि च।
पानकानि च सेवेत् मन्थाश्चापि सशर्करान्।।
भोजनं च हितं शीतं सघृतं मधुरद्रवम्।
श्रतेन पयसा रात्रो शर्करा मधुरेण च।।"
अर्थात् बर्फ से शीतल किये हुए मधुर और सुगन्धित पेय तथा जल व घृत युक्त सत्तू का सेवन करना चाहिए। भोजन शुद्ध, स्निग्ध/ घृत और मधुर रस युक्त करना चाहिए और रात को सोते वक्त उबाल कर ठण्डा किया हुआ मीठा(शहद युक्त) दूध पीना चाहिए।
* सिर पर कपड़ा(गमछा) लपेट कर या छाता लगा कर बाहर निकलें। धूप में घूमते हुए ठण्डा पानी या पेय पदार्थ न पीएं।
* घर से निकलते समय एक गिलास ठण्डा पानी पी लें और जेब में एक प्याज रख लें। ऐसा करने से लू नहीं लगेगी।
* वापस घर को आएं तो तुरन्त ठण्डा पानी न पीएं, थोड़ी देर रुक कर शरीर को ठण्डा कर पानी पीएं। एक समय में एक गिलास पानी ही पीएं।
* बिना प्यास के भी घण्टे-घण्टे भर से पानी पीना चाहिए।
* तेज मिर्च-मसाले और गर्म प्रकृति वाला भोजन शराब, अण्डा, मांसाहार आदि का सेवन करने से पेशाब में रुकावट और जलन, अल्सर, एसिडिटी, हयपरएसिडिटी आदि बिमारियां उत्पन्न होती हैं।
* ग्रीष्म ऋतु में शीतल और तरावट वाला आहार ग्रहण करना चाहिए।
ग्रीष्म ऋतु में आयुर्वेदशास्त्र के अनुसार मधुर रस युक्त स्निग्ध(चिकनाई युक्त), शीतल, तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
सुश्रुत संहिता के अनुसार-
"शर्करा खण्ड दिग्धानि सुगन्धीनि हिमानि च।
पानकानि च सेवेत् मन्थाश्चापि सशर्करान्।।
भोजनं च हितं शीतं सघृतं मधुरद्रवम्।
श्रतेन पयसा रात्रो शर्करा मधुरेण च।।"
अर्थात् बर्फ से शीतल किये हुए मधुर और सुगन्धित पेय तथा जल व घृत युक्त सत्तू का सेवन करना चाहिए। भोजन शुद्ध, स्निग्ध/ घृत और मधुर रस युक्त करना चाहिए और रात को सोते वक्त उबाल कर ठण्डा किया हुआ मीठा(शहद युक्त) दूध पीना चाहिए।
Very informative
ReplyDeleteबढ़िया
ReplyDeleteबहुत बढ़िया
ReplyDeleteHot
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